SSC एग्जाम में बर्बादी की इबारत: Ediquity की लापरवाही ने छात्रों का भविष्य दांव पर लगाया

भारत के करोड़ों युवाओं का सपना सरकारी नौकरी की ओर बढ़ता है, लेकिन स्टाफ सिलेक्शन कमीशन (SSC) द्वारा कराई जा रही परीक्षा में भारी अव्यवस्था और तकनीकी गड़बड़ियों ने लाखों छात्रों के भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं। SSC ने इस वर्ष परीक्षा संचालन की जिम्मेदारी TCS से हटाकर Ediquity नामक कंपनी को दी, जिसकी अनुभवहीनता अब छात्रों की तकलीफ बन गई है।

24 जुलाई से शुरू हुई SSC सिलेक्शन पोस्ट परीक्षा में पहले ही दिन छात्रों को तकनीकी खामियों, अव्यवस्थित स्टाफ और खराब मैनेजमेंट का सामना करना पड़ा। सबसे शर्मनाक स्थिति तब सामने आई जब दिल्ली के गुरु हरगोबिंद सेंटर में कई छात्रों को परीक्षा केंद्र से बाहर कर दिया गया, जबकि वे समय से पहले उपस्थित थे और प्रक्रिया में लगे हुए थे।

क्या हुआ परीक्षा केंद्र पर?

  • 12वीं लेवल परीक्षा का समय था दोपहर 2 बजे, लेकिन वेरिफिकेशन ही 4 बजे तक चला
  • इसके बाद ग्रेजुएशन लेवल के छात्रों की बारी आई, लेकिन सर्वर क्रैश हो गया
  • जिन छात्रों का वेरिफिकेशन नहीं हुआ था, उन्हें एक तरफ खड़ा कर दिया गया
  • लैब के गेट बंद कर दिए गए, और आंशिक छात्रों को ही परीक्षा में बैठने दिया गया
  • बाहर खड़े छात्रों ने विरोध किया, रोते रहे, लेकिन उन्हें एग्जाम देने का मौका नहीं मिला
  • एक बाउंसर द्वारा छात्र की पिटाई की घटना भी सामने आई

Ediquity पर उठे सवाल

Ediquity को परीक्षा संचालन का ठेका कैसे और क्यों दिया गया, जब इसकी पहले से तकनीकी साख संदिग्ध थी? परीक्षा केंद्रों पर कम अनुभवी स्टाफ, जिनमें कई खुद नाबालिग दिख रहे थे, को तैनात किया गया। किसी को दस्तावेजों की जानकारी नहीं थी, और सुरक्षा व कंट्रोल का कोई स्पष्ट प्लान नजर नहीं आया।

छात्रों का आक्रोश, सोशल मीडिया पर विरोध शुरू

देशभर से छात्र सोशल मीडिया पर अपनी आपबीती साझा कर रहे हैं। #SSCFailure और #EdiquityRemove जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। छात्र मांग कर रहे हैं कि:

  • Ediquity को तुरंत हटाया जाए
  • पूरे मामले की जांच हो
  • जिन छात्रों को परीक्षा से रोका गया, उनके लिए दोबारा परीक्षा आयोजित हो
  • जवाबदेही तय की जाए और दोषियों पर कार्रवाई हो

सरकार और SSC चुप क्यों?

अभी तक न SSC की ओर से कोई ठोस बयान आया है और न ही सरकार ने इस गंभीर लापरवाही पर प्रतिक्रिया दी है। युवाओं का गुस्सा अब सड़कों से सोशल मीडिया तक दिखाई दे रहा है। यदि जल्द ही कोई कदम नहीं उठाया गया, तो यह लहर एक बड़े छात्र आंदोलन का रूप ले सकती है।


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