मानवता शर्मसार: बच्चों ने मटर चुराई, गांव वालों ने हाथ बांध पीटा और पूरे गांव में घुमाया

मुंगेर (बिहार): मुंगेर जिले के झौवाबहियार गांव में चार मासूम बच्चों के साथ जो कुछ हुआ, उसने सिर्फ उन्हें नहीं, पूरे समाज को शर्मसार कर दिया। महज 25 किलो मटर की चोरी के आरोप में 10 से 12 साल के चार नाबालिग बच्चों को गांव वालों ने पकड़कर न सिर्फ बेरहमी से पीटा, बल्कि रस्सी से हाथ बांधकर पूरे गांव में घुमाया गया। इस अमानवीय ‘सजा’ का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल भी कर दिया गया।

गलती की सजा या बर्बरता की मिसाल?

घटना बरियारपुर प्रखंड के गंगा पार इलाके की है, जहां मटर चोरी की एक छोटी-सी घटना ने भीड़ की क्रूरता को उजागर कर दिया। ग्रामीणों के मुताबिक एक व्यक्ति के घर से 25 किलो मटर की चोरी हुई थी। शक के आधार पर एक बच्चे को पकड़ा गया, जिसकी पिटाई के बाद बाकी तीन बच्चों का नाम उजागर हुआ। इसके बाद सभी चारों बच्चों को उनके घर से पकड़कर गांव के चौराहे पर लाया गया, जहां उन्हें पीटा गया और फिर रस्सी से हाथ बांध पूरे गांव में घुमाया गया।

वीडियो बनाकर कहा गया – ‘वायरल कर दो’

इस दौरान किसी ने भी बच्चों की बेबसी और भय से भरी आंखों की परवाह नहीं की। कुछ ग्रामीणों को यह कहते सुना गया – “वीडियो वायरल कर दो, ताकि सबको सबक मिले।” वीडियो में चारों बच्चे सिर झुकाए, आंसुओं के साथ चलते नजर आते हैं। उनके चेहरों पर शर्म और डर दोनों साफ दिख रहे हैं।

समाज का मौन समर्थन, परिजन भी खामोश

सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात यह रही कि पीड़ित बच्चों के परिजन भी इस अमानवीय सजा का खुलकर विरोध नहीं कर सके। ग्रामीणों की मानसिकता इतनी कठोर थी कि बच्चों की गलती को सुधारने की जगह उन्हें सार्वजनिक रूप से अपमानित किया गया। कई बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस घटना को “मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन” बताया है।

कानून हाथ में नहीं ले सकते: पुलिस अधीक्षक

घटना का वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस हरकत में आई। मुंगेर के पुलिस अधीक्षक सैयद इमरान मसूद ने कहा, “हमारे पास वीडियो आया है, जांच जारी है। कानून हाथ में लेने की इजाजत किसी को नहीं है। दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।” पुलिस सूत्रों के अनुसार इस मामले में बाल संरक्षण कानून और आईपीसी की कई धाराओं के तहत केस दर्ज हो सकता है।

“बच्चे भविष्य हैं, अपराधी नहीं। सुधार की जगह सार्वजनिक शर्मिंदगी देना एक सामूहिक सामाजिक अपराध है।”

समाज को यह समझना होगा कि बच्चों की गलती को सुधारने के लिए न्यायिक और मानवीय रास्ते हैं, न कि बेइज्जती और हिंसा के। आज इन मासूमों को मटर चोरी के लिए घसीटा गया, कल उन्हें अपराध की दुनिया में धकेलने की जिम्मेदारी किसकी होगी?


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