उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) ने राज्य के करोड़ों उपभोक्ताओं पर बड़ा फैसला लेते हुए स्मार्ट मीटर वाले उपभोक्ताओं के लिए पोस्टपेड बिलिंग सिस्टम खत्म कर दिया है। अब बिजली का मज़ा मोबाइल की तरह प्रीपेड रिचार्ज से लेना होगा।
🔑 नई व्यवस्था की मुख्य बातें
- पुराना सिक्योरिटी अमाउंट → प्रीपेड बैलेंस में समायोजित होगा।
- बकायेदार उपभोक्ता → पहले पूरा भुगतान करना होगा, तभी प्रीपेड पर स्विच मिलेगा।
- ग्रेस पीरियड → रिचार्ज खत्म होने पर 30 दिन की मोहलत + 3 दिन का ‘इमरजेंसी क्रेडिट’, उसके बाद अंधेरा तय।
- छूट → प्रीपेड पर बिजली दरों में 2% डिस्काउंट।
- लेट पेमेंट → समय से रिचार्ज न करने पर लेट फीस और ब्याज।
⚡ बकाएदारों पर सख्ती का फार्मूला
- ₹10,000 तक बकाया → 10% समायोजित
- ₹20,000 से अधिक बकाया → 25% तक अतिरिक्त बोझ
यूपीपीसीएल का कहना है कि बिना हिसाब चुकाए किसी को भी प्रीपेड कनेक्शन नहीं मिलेगा।
📢 उपभोक्ताओं और विभाग की प्रतिक्रिया
- उपभोक्ता बोले: “अब हर महीने रिचार्ज का झंझट रहेगा, ये आम जनता पर बोझ है।”
- विभाग का दावा: “यह कदम बिजली चोरी रोकने और बिलिंग सिस्टम पारदर्शी बनाने के लिए जरूरी है।”
📲 आगे की राह
UPPCL ने उपभोक्ताओं से मोबाइल ऐप डाउनलोड करने और उसी से रिचार्ज व शिकायत दर्ज करने की अपील की है। विभाग का संदेश साफ है –
👉 “अब बिजली भी मोबाइल रिचार्ज की तरह – जितना डालोगे उतना पाओगे।”
मैं विवेक शर्मा, समाजसेवी एवं आरटीआई एक्टिविस्ट, आप सभी के समक्ष “पब्लिक की बात” एक स्वतंत्र डिजिटल न्यूज़ मंच, जो आम जनता की आवाज़ को मजबूती और ईमानदारी के साथ सामने लाने के लिए प्रतिबद्ध है।
पब्लिक की बात का उद्देश्य केवल समाचार देना नहीं, बल्कि लोकतंत्र में जनता की भागीदारी को सशक्त करना है। हम राजनीति, प्रशासन, भ्रष्टाचार, सामाजिक सरोकारों और ज़मीनी सच्चाइयों से जुड़ी खबरों को निष्पक्ष, तथ्यपरक और निर्भीक रूप से आप तक पहुँचाने का प्रयास करते हैं।
यह मंच उन सवालों की आवाज़ है जो अक्सर दबा दिए जाते हैं, उन मुद्दों का आईना है जिन्हें नजरअंदाज कर दिया जाता है, और उन आम लोगों का प्रतिनिधि है जिनकी बात सत्ता के गलियारों तक नहीं पहुँच पाती।
पब्लिक की बात — क्योंकि सवाल पूछना और सच दिखाना लोकतंत्र की ताकत है।
