दक्षिण भारतीय सिनेमा के सुपरस्टार और हाल ही में दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित अभिनेता मोहनलाल ने अपनी बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘दृश्यम 3’ की शुरुआत कर दी है। शूटिंग शुरू होने से पहले फिल्म से जुड़े कलाकारों और क्रू ने परंपरागत पूजा की, जिसकी तस्वीरें मोहनलाल ने सोशल मीडिया पर साझा कीं।
फोटो पोस्ट करते हुए मोहनलाल ने लिखा –
“जॉर्ज कुट्टी की दुनिया को एक बार फिर जीवंत करते हुए, आज पूजा के साथ ‘दृश्यम 3’ की शुरुआत हो रही है।”
🔹 दृश्यम फ्रेंचाइज़ की खासियत
- पहली फिल्म ‘दृश्यम’ (2013) का निर्देशन जीतू जोसेफ ने किया था। इसमें मोहनलाल ने जॉर्ज कुट्टी का किरदार निभाया था।
- कहानी एक आम इंसान के संघर्ष पर आधारित है, जो अपने परिवार को बचाने के लिए असंभव हालात से लड़ता है।
- फिल्म का दूसरा भाग ‘दृश्यम 2’ (2021) भी जबरदस्त हिट रहा, जिसने दर्शकों को फिर से बांधे रखा।
- हिंदी सिनेमा में इस कहानी को अजय देवगन के साथ रीमेक किया गया, जिसने भी बड़ी सफलता हासिल की।
🔹 मोहनलाल और दादासाहेब फाल्के सम्मान
हाल ही में मोहनलाल को भारतीय सिनेमा का सबसे बड़ा सम्मान – दादासाहेब फाल्के पुरस्कार मिला।
इस पर उन्होंने कहा:
“यह मलयालम फिल्म उद्योग के लिए श्रद्धांजलि है। 20 साल बाद यह पुरस्कार हमारी इंडस्ट्री में आया है, इसलिए मैं इसे अपने सभी साथियों के साथ साझा करता हूं।”
🔹 मोहनलाल का करियर
- चार दशकों से अधिक का करियर
- मलयालम, तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और हिंदी फिल्मों में शानदार योगदान
- राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार, पद्मश्री और पद्मभूषण से सम्मानित
- भारतीय सिनेमा के सबसे बहुमुखी और प्रशंसित अभिनेताओं में गिने जाते हैं।
👉 अब जब ‘दृश्यम 3’ की शुरुआत हो चुकी है, तो दर्शकों में फिल्म के प्रति उत्साह कई गुना बढ़ गया है। फैंस बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं कि एक बार फिर जॉर्ज कुट्टी किस तरह अपने परिवार को संकट से निकालेंगे।
मैं विवेक शर्मा, समाजसेवी एवं आरटीआई एक्टिविस्ट, आप सभी के समक्ष “पब्लिक की बात” एक स्वतंत्र डिजिटल न्यूज़ मंच, जो आम जनता की आवाज़ को मजबूती और ईमानदारी के साथ सामने लाने के लिए प्रतिबद्ध है।
पब्लिक की बात का उद्देश्य केवल समाचार देना नहीं, बल्कि लोकतंत्र में जनता की भागीदारी को सशक्त करना है। हम राजनीति, प्रशासन, भ्रष्टाचार, सामाजिक सरोकारों और ज़मीनी सच्चाइयों से जुड़ी खबरों को निष्पक्ष, तथ्यपरक और निर्भीक रूप से आप तक पहुँचाने का प्रयास करते हैं।
यह मंच उन सवालों की आवाज़ है जो अक्सर दबा दिए जाते हैं, उन मुद्दों का आईना है जिन्हें नजरअंदाज कर दिया जाता है, और उन आम लोगों का प्रतिनिधि है जिनकी बात सत्ता के गलियारों तक नहीं पहुँच पाती।
पब्लिक की बात — क्योंकि सवाल पूछना और सच दिखाना लोकतंत्र की ताकत है।
