लखनऊ में बिजली व्यवस्था पर ‘वर्टिकल शॉक’! नई प्रणाली से उपभोक्ता और कर्मचारी दोनों परेशान
📍 लखनऊ | आवाज़ प्लस संवाददाता
📆 06 जुलाई 2025
राजधानी लखनऊ में बिजली आपूर्ति को लेकर उपभोक्ताओं की चिंताएं और शिकायतें दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही हैं। कारण है—बिजली विभाग द्वारा लागू की गई नई ‘वर्टिकल व्यवस्था’, जो अब आम जनता के लिए परेशानी का सबब बन रही है।
⚡ वर्टिकल व्यवस्था: सुधार या उलझन?
बरेली समेत कई शहरों में पहले से लागू इस प्रणाली को अब लखनऊ में भी लागू किया गया है। लेकिन जिस सुधार की उम्मीद थी, वह अब उपभोक्ताओं के लिए भ्रम और कर्मचारियों के लिए बोझ बनता दिख रहा है।
🧾 एक्सईएन पर फॉल्ट से लेकर बिल तक की ज़िम्मेदारी!
बिजली विभाग के सूत्रों के अनुसार, नई व्यवस्था के तहत:
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पूरे डिवीजन की 11 केवी और एलटी लाइनों की ज़िम्मेदारी एक ही अधिशासी अभियंता (एक्सईएन) के पास है।
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एसडीओ और जेई को अलग-अलग सब स्टेशनों में बाँट दिया गया है।
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33 केवी, 11 केवी, एलटी लाइन, बिलिंग, राजस्व और शिकायत— ये सभी काम अब विभिन्न एक्सईएन के भरोसे हैं।
पहले जहां हर ज़ोन में एक एक्सईएन, एसडीओ और जेई की स्पष्ट ज़िम्मेदारी होती थी, अब उपभोक्ताओं को यह समझना भी मुश्किल हो गया है कि फॉल्ट आने पर किससे संपर्क करें।
🔌 ‘घनचक्कर’ बन गया है फॉल्ट समाधान!
नए सिस्टम का चार्ट देखकर उपभोक्ता भ्रमित हो रहे हैं।
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फॉल्ट की स्थिति में जिम्मेदार कौन होगा?
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शिकायत कहां दर्ज की जाए?
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समाधान की प्रक्रिया क्या होगी?
बिजली घरों में मौजूद कर्मचारी तक कई बार सटीक जानकारी नहीं दे पा रहे हैं, जिससे उपभोक्ताओं को कई चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
⚠️ जनहित में पुनर्विचार जरूरी
लखनऊ के नागरिकों ने इस नई व्यवस्था को ‘वर्टिकल शॉक’ करार दिया है। बिजली विभाग से जुड़े कर्मचारी संगठन भी मानते हैं कि यह व्यवस्था स्थानीय जरूरतों के अनुसार व्यावहारिक नहीं है।
विशेषज्ञों का मानना है कि:
“अन्य शहरों की अव्यवस्थाओं से सबक लेकर लखनऊ में इस प्रणाली पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए, ताकि जनता को राहत मिल सके और बिजली की बजाय सिर्फ परेशानी का करंट न लगे।”
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