पवन सिंह ने ‘राइज एंड फॉल’ शो बीच में छोड़ा, विदाई के दौरान को-कंटेस्टेंट्स हुए भावुक

भोजपुरी सुपरस्टार पवन सिंह ने हाल ही में रियलिटी शो ‘राइज एंड फॉल’ को बीच में ही अलविदा कह दिया। शो छोड़ने के बाद उन्होंने स्पष्ट किया कि वे कभी प्रतियोगी (कंटेस्टेंट) नहीं थे, बल्कि थोड़े समय के लिए गेस्ट के तौर पर ही आए थे। उनके परिवार वाले उन्हें सेट से घर ले गए।

पवन सिंह की विदाई का भावुक अंदाज

पवन सिंह ने अपने सह-प्रतियोगियों से कहा:

“मैं इस मंच से बोलकर जा रहा हूं कि सिर्फ मैं जा रहा हूं सेवा के लिए, लेकिन मैं आप सभी के साथ हूं। ये गेम सच्चे दिल से खेलिए, हंसाते रहिए। जय हो!”

उनकी इस विदाई के दौरान धनश्री व बाकी कंटेस्टेंट्स रोते हुए नजर आए। पवन ने आगे कहा कि भले ही वे हमेशा के लिए नहीं रहेंगे, लेकिन जब भी उन्हें याद किया जाएगा, वे समय निकालकर मिलने जरूर आएंगे।

शो में पवन सिंह की लोकप्रियता

  • शो में आने के बाद उन्हें टीआरपी किंग कहा जाने लगा।
  • उनके दयालु और विनम्र स्वभाव ने साथी कंटेस्टेंट्स और दर्शकों का दिल जीता।
  • शो में उनकी हंसी-मजाक और मस्ती फैंस को काफी पसंद आई।

विवाद और आलोचना

हालांकि कुछ टिप्पणियों पर नेटिजन्स ने सवाल उठाए। एक क्लिप में पवन सिंह ने नयनदीप से क्लीन शेव, साड़ी, बिंदी और काजल पहने अपनी तस्वीर खिंचवाने के लिए कहा, जिसे लेकर सोशल मीडिया पर बहस हुई।

शो छोड़ने की पृष्ठभूमि

पवन सिंह के शो छोड़ने के फैसले के पीछे व्यक्तिगत कारण रहे। इससे पहले भी प्रतियोगी संगीता फोगट ने अपने ससुर के आकस्मिक निधन के कारण शो छोड़ दिया था।

निष्कर्ष:
पवन सिंह की विदाई ने ‘राइज एंड फॉल’ के माहौल को भावुक बना दिया। उनके जाने से शो के फैंस और सह-प्रतियोगियों दोनों ही निराश हैं, लेकिन उनके शब्दों में सेवा, सम्मान और सच्चाई की भावना बनी रही।


मैं विवेक शर्मा, समाजसेवी एवं आरटीआई एक्टिविस्ट, आप सभी के समक्ष “पब्लिक की बात” एक स्वतंत्र डिजिटल न्यूज़ मंच, जो आम जनता की आवाज़ को मजबूती और ईमानदारी के साथ सामने लाने के लिए प्रतिबद्ध है।

पब्लिक की बात का उद्देश्य केवल समाचार देना नहीं, बल्कि लोकतंत्र में जनता की भागीदारी को सशक्त करना है। हम राजनीति, प्रशासन, भ्रष्टाचार, सामाजिक सरोकारों और ज़मीनी सच्चाइयों से जुड़ी खबरों को निष्पक्ष, तथ्यपरक और निर्भीक रूप से आप तक पहुँचाने का प्रयास करते हैं।

यह मंच उन सवालों की आवाज़ है जो अक्सर दबा दिए जाते हैं, उन मुद्दों का आईना है जिन्हें नजरअंदाज कर दिया जाता है, और उन आम लोगों का प्रतिनिधि है जिनकी बात सत्ता के गलियारों तक नहीं पहुँच पाती।

पब्लिक की बात — क्योंकि सवाल पूछना और सच दिखाना लोकतंत्र की ताकत है।

Click to Un-Mute
WhatsApp icon
Public Ki Baat
Contact us!
Phone icon
Public Ki Baat