लखनऊ के पेपर मिल कॉलोनी निवासी साक्षी (डायल-112 की टेलीकॉलर) 29 अगस्त की रात से घर से लापता हैं।
घटना की रूपरेखा
- 29 अगस्त की शाम साक्षी ने अपनी मां संगीता वर्मा को कॉल किया और बताया कि वह गणेश विसर्जन देखने जा रही है।
- मां ने कहा, “जल्दी आ जाना, खाना बना लेना।” साक्षी ने जवाब दिया, “ठीक है मम्मी।”
- काफी देर तक साक्षी घर नहीं लौटी। रात 8:32 बजे मां ने फोन किया तो किसी और ने कॉल उठाया। पीछे से साक्षी की घबराई हुई आवाज आई, “मेरा फोन दो, मुझे मम्मी से बात करनी है।” इसके बाद कॉल कट गया और साक्षी का फोन फिर कभी ऑन नहीं हुआ।
मोबाइल और वाहन बरामद
- साक्षी का मोबाइल और आरोपी कृष्णा जायसवाल उर्फ सचिन की गाड़ी चारबाग रेलवे स्टेशन से मिली।
- 4 सितंबर को पुलिस ने आरोपी को भोपाल से गिरफ्तार किया, लेकिन साक्षी का अभी तक कोई सुराग नहीं मिला।
परिजनों का आरोप और चिंता
- मां संगीता वर्मा ने कहा कि पुलिस विभाग में काम करने वाली बेटी अब उसी विभाग से सुरक्षा नहीं पा रही।
- परिजनों और दोस्तों का कहना है कि साक्षी नदी में कूदने जैसी किसी स्थिति में नहीं थी, और अभी तक कोई CCTV फुटेज या शव नहीं मिला।
- मां ने SIT गठित कर सख्ती से पूछताछ की मांग की है।
दादी का बयान
- दादी उर्मिला देवी ने बताया कि गणेश विसर्जन वाले दिन एक अनजान लड़का घर में घुसा।
- उसने साक्षी से मिलने के बहाने उसे घर से बाहर ले जाकर नहीं लौटाया।
पुलिस की जांच
- पुलिस ने गोमती नदी में सर्च ऑपरेशन भी किया।
- पांच टीमें साक्षी की तलाश में लगी हैं।
- परिजन पुलिस की गोमती नदी में कूदने वाली थ्योरी मानने को तैयार नहीं हैं।
इस मामले में अभी साक्षी का कोई सुराग नहीं मिला है, और परिवार ने SIT गठित कर आरोपी से कड़ी पूछताछ की मांग की है।
मैं विवेक शर्मा, समाजसेवी एवं आरटीआई एक्टिविस्ट, आप सभी के समक्ष “पब्लिक की बात” एक स्वतंत्र डिजिटल न्यूज़ मंच, जो आम जनता की आवाज़ को मजबूती और ईमानदारी के साथ सामने लाने के लिए प्रतिबद्ध है।
पब्लिक की बात का उद्देश्य केवल समाचार देना नहीं, बल्कि लोकतंत्र में जनता की भागीदारी को सशक्त करना है। हम राजनीति, प्रशासन, भ्रष्टाचार, सामाजिक सरोकारों और ज़मीनी सच्चाइयों से जुड़ी खबरों को निष्पक्ष, तथ्यपरक और निर्भीक रूप से आप तक पहुँचाने का प्रयास करते हैं।
यह मंच उन सवालों की आवाज़ है जो अक्सर दबा दिए जाते हैं, उन मुद्दों का आईना है जिन्हें नजरअंदाज कर दिया जाता है, और उन आम लोगों का प्रतिनिधि है जिनकी बात सत्ता के गलियारों तक नहीं पहुँच पाती।
पब्लिक की बात — क्योंकि सवाल पूछना और सच दिखाना लोकतंत्र की ताकत है।
