राजधानी लखनऊ के थाना मड़ियांव क्षेत्र में स्थित घैला पुल के पास सोमवार देर शाम एक दर्दनाक हादसा हो गया। एक ट्रैक्टर-ट्रॉली पर लदे भारी-भरकम बिजली के पोल अचानक खिसककर ड्राइवर की ओर गिर पड़े, जिससे चालक गंभीर रूप से घायल हो गया। उसकी हालत बेहद नाजुक बताई जा रही है और डॉक्टर जीवन बचाने की कोशिश में जुटे हैं।
🔍 कैसे हुआ हादसा?
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार:
- ट्रॉली पर बिजली के पोल लोड किए तो गए थे, लेकिन न तो ठीक से बैलेंस किया गया था और
- न ही किसी तरह का सुरक्षा प्रबंध अपनाया गया।
- जैसे ही ट्रैक्टर-ट्रॉली ने घैला पुल की ढलान पकड़ी, वाहन में तेज झटका लगा।
- इसी दौरान ऊपर रखे लंबे और भारी पोल खिसककर आगे बैठे ड्राइवर पर जा गिरे।
- कुछ ही सेकंड में पूरा वजन ड्राइवर के केबिन को कुचल गया और चालक बुरी तरह फंस गया।
🆘 लोगों की चीख-पुकार और राहत कार्य
हादसे के बाद मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत शोर मचाया और:
- ड्राइवर को बाहर निकालने की कोशिश की
- पुलिस और एम्बुलेंस को सूचना दी
- कई लोग मिलकर पोल हटाने में लगे, तब जाकर गंभीर रूप से घायल ड्राइवर को अस्पताल ले जाया गया।
⚠️ सुरक्षा मानकों की खुली पोल
इस घटना ने ये साफ कर दिया कि:
- भारी सामान ले जाने वाले वाहनों में सुरक्षा मानकों का पालन अक्सर नहीं किया जाता।
- लंबे पोल या लोहे के पाइप जैसे सामान को लोड करते समय बैलेंसिंग, रस्सियों से बांधना और वजन के हिसाब से प्लेसमेंट जैसी सुरक्षा प्रक्रियाएँ नजरअंदाज की जाती हैं।
- ऐसी लापरवाही न सिर्फ वाहन चालक बल्कि राहगीरों की जान भी जोखिम में डालती है।
🚨 पुलिस की कार्रवाई
पुलिस ने ट्रैक्टर-ट्रॉली को कब्जे में ले लिया है और हादसे की वजह—पोल खिसकने, गलत लोडिंग और सुरक्षा नियमों की अनदेखी—की जांच शुरू कर दी है।
📌 URL (बिना बदलाव):
👉 https://uppclmedia.in/breaking/33943
मैं विवेक शर्मा, समाजसेवी एवं आरटीआई एक्टिविस्ट, आप सभी के समक्ष “पब्लिक की बात” एक स्वतंत्र डिजिटल न्यूज़ मंच, जो आम जनता की आवाज़ को मजबूती और ईमानदारी के साथ सामने लाने के लिए प्रतिबद्ध है।
पब्लिक की बात का उद्देश्य केवल समाचार देना नहीं, बल्कि लोकतंत्र में जनता की भागीदारी को सशक्त करना है। हम राजनीति, प्रशासन, भ्रष्टाचार, सामाजिक सरोकारों और ज़मीनी सच्चाइयों से जुड़ी खबरों को निष्पक्ष, तथ्यपरक और निर्भीक रूप से आप तक पहुँचाने का प्रयास करते हैं।
यह मंच उन सवालों की आवाज़ है जो अक्सर दबा दिए जाते हैं, उन मुद्दों का आईना है जिन्हें नजरअंदाज कर दिया जाता है, और उन आम लोगों का प्रतिनिधि है जिनकी बात सत्ता के गलियारों तक नहीं पहुँच पाती।
पब्लिक की बात — क्योंकि सवाल पूछना और सच दिखाना लोकतंत्र की ताकत है।
