उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले से सामने आई यह घटना इंसानियत को झकझोर देने वाली है। जिस बेटे को माता-पिता ने जन्म दिया, पाला-पोसा और बड़ा किया, उसी बेटे ने उनकी निर्ममता से हत्या कर दी और फिर खुद को बचाने के लिए ऐसा झूठा नाटक रचा कि सुनकर हर कोई हैरान रह गया।
गांव में मचा हड़कंप
यह सनसनीखेज मामला जफराबाद थाना क्षेत्र के अहमदपुर गांव का है। गांव में उस समय हड़कंप मच गया, जब यह खुलासा हुआ कि एक युवक ने अपने ही माता-पिता को सिल-बट्टे से कूंचकर मार डाला और फिर उनके शव गोमती नदी में फेंक दिए।
गुमशुदगी का झूठा नाटक
मामले को और भी चौंकाने वाला बनाने वाली बात यह है कि—
इसका मकसद साफ था—
👉 पुलिस को गुमराह करना
👉 खुद को मासूम साबित करना
👉 और शक से बाहर रहना
शुरुआत में पुलिस ने भी मामले को सामान्य गुमशुदगी मानकर जांच शुरू की।
बेटी की शिकायत से खुला राज
लेकिन कहानी में मोड़ तब आया, जब मृतक दंपती की बेटी ने पुलिस को तहरीर दी।
इसके बाद पुलिस ने मामले की गहन जांच शुरू की।
जांच में टूटा झूठ का जाल
पुलिस की पूछताछ और साक्ष्यों के आधार पर धीरे-धीरे
कड़ाई से पूछताछ करने पर आरोपी टूट गया और उसने माता-पिता की हत्या की बात कबूल कर ली।
सिल-बट्टे से की थी हत्या
पुलिस जांच में सामने आया कि—
-
बेटे ने घरेलू विवाद के चलते
-
पहले अपने माता-पिता पर हमला किया
-
सिल-बट्टे से दोनों को बेरहमी से कूंचकर मार डाला
हत्या के बाद
शवों की तलाश जारी
फिलहाल पुलिस
साथ ही
गांव और इलाके में दहशत
इस खुलासे के बाद
निष्कर्ष
यह मामला सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि
पुलिस का कहना है कि मामले में सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी, ताकि ऐसा जघन्य अपराध करने वालों को कड़ा संदेश दिया जा सके।
मैं विवेक शर्मा, समाजसेवी एवं आरटीआई एक्टिविस्ट, आप सभी के समक्ष “पब्लिक की बात” एक स्वतंत्र डिजिटल न्यूज़ मंच, जो आम जनता की आवाज़ को मजबूती और ईमानदारी के साथ सामने लाने के लिए प्रतिबद्ध है।
पब्लिक की बात का उद्देश्य केवल समाचार देना नहीं, बल्कि लोकतंत्र में जनता की भागीदारी को सशक्त करना है। हम राजनीति, प्रशासन, भ्रष्टाचार, सामाजिक सरोकारों और ज़मीनी सच्चाइयों से जुड़ी खबरों को निष्पक्ष, तथ्यपरक और निर्भीक रूप से आप तक पहुँचाने का प्रयास करते हैं।
यह मंच उन सवालों की आवाज़ है जो अक्सर दबा दिए जाते हैं, उन मुद्दों का आईना है जिन्हें नजरअंदाज कर दिया जाता है, और उन आम लोगों का प्रतिनिधि है जिनकी बात सत्ता के गलियारों तक नहीं पहुँच पाती।
पब्लिक की बात — क्योंकि सवाल पूछना और सच दिखाना लोकतंत्र की ताकत है।