प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात जल्द हो सकती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों नेता इस महीने के अंत में मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर में होने वाले 47वें आसियान शिखर सम्मेलन से इतर आमने-सामने बैठ सकते हैं। यह मुलाकात इसलिए अहम मानी जा रही है क्योंकि हाल ही में अमेरिका ने भारत पर 50% टैरिफ लागू किया है और वीजा पॉलिसी को लेकर भी विवाद गहराया है।
🔹 टैरिफ और वीजा विवाद के बाद पहली बैठक
अगर ट्रंप इस सम्मेलन में शामिल होते हैं, तो यह दोनों नेताओं की टैरिफ लागू होने के बाद पहली बहुपक्षीय बैठक होगी। इससे पहले कनाडा में जून 2025 में हुए जी-7 शिखर सम्मेलन में दोनों की मुलाकात टल गई थी। इस बार उम्मीद है कि ट्रेड बैलेंस, वीजा इश्यू और भारतीय आईटी पेशेवरों के हित जैसे मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।
🔹 रूस से तेल आयात पर भी चर्चा संभव
ट्रंप प्रशासन लगातार भारत की रूस से कच्चा तेल खरीदने की आलोचना करता रहा है। अमेरिका का मानना है कि इससे यूक्रेन युद्ध को रोकने के लिए मॉस्को पर वैश्विक दबाव कमजोर होता है। हालांकि, भारत ने अब तक स्पष्ट किया है कि वह अपनी ऊर्जा सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं करेगा।
🔹 आसियान सम्मेलन का महत्व
आसियान शिखर सम्मेलन दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों—ब्रुनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, म्यांमार, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड और वियतनाम—का वार्षिक मंच है। इसमें आर्थिक, राजनीतिक और सुरक्षा सहयोग पर चर्चा होती है। अमेरिका को भी विशेष आमंत्रण दिया गया है, जिससे मोदी-ट्रंप मुलाकात की संभावना और मजबूत हो गई है।
👉 इस संभावित बैठक को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नजरें टिकी हैं। अब देखने वाली बात होगी कि क्या टैरिफ और वीजा जैसे जटिल मुद्दों पर कोई सकारात्मक समाधान निकल पाता है या नहीं।
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