वाराणसी में जमीन विवाद: पूर्व BJP विधायक के बेटे पर आरोप, पड़ोसी के गेट के सामने दीवार खड़ी करने से मचा बवाल

वाराणसी में जमीन विवाद को लेकर बड़ा बवाल खड़ा हो गया है। मामला भेलूपुर थाना क्षेत्र के बजरडीहा इलाके का है, जहां पूर्व भाजपा विधायक सुनीता सिंह के बेटे प्रशांत सिंह पर जबरन कब्जे और रास्ता बंद करने का आरोप लगा है। 14 सितंबर को उन्होंने पड़ोसी के गेट के ठीक सामने ईंट की दीवार खड़ी करवा दी। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही प्रशासन और पुलिस हरकत में आ गई।

वायरल वीडियो ने बढ़ाई गर्मी

वीडियो में देखा जा सकता है कि लाल टी-शर्ट पहने प्रशांत सिंह ताले लगे गेट के सामने मजदूरों से दीवार बनवा रहे हैं। अंदर से महिलाएं इसका विरोध कर रही हैं और जोर-जोर से बहस कर रही हैं। महिलाओं का आरोप है कि प्रशांत सिंह दबंगई कर उनकी जमीन हड़पने और रास्ता बंद करने की कोशिश कर रहे हैं।

विवाद की जड़: रास्ता और जमीन का मसला

पीड़ित गीता देवी और अन्य महिलाओं के मुताबिक, प्रशांत सिंह की जमीन उनके मकान के पीछे है। वहां तक पहुंचने का कोई सीधा रास्ता नहीं है। इस वजह से आपसी सहमति से उन्हें अपने हिस्से की जमीन से रास्ता दिया गया था। लेकिन जब प्रशांत सिंह ने अपनी जमीन पर सोसाइटी बनाने की योजना बनाई और कथित तौर पर उनकी जमीन भी खरीदने का दबाव बनाया, तो गीता देवी ने इनकार कर दिया। इसके बाद अचानक गेट के सामने दीवार खड़ी कर दी गई, जिससे उनका आना-जाना रुक गया।

पुलिस और प्रशासन की भूमिका

विवाद की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों को थाने बुलाया। एसीपी गौरव कुमार ने बताया कि कागजात की जांच की गई है। एक पक्ष का कहना है कि रास्ता उनकी छोड़ी हुई जमीन पर है, जबकि दूसरा पक्ष आपसी सहमति की बात करता है। अब मामला एसडीएम के पास भेजा गया है। लेखपाल द्वारा जमीन की नाप-जोख होगी और उसी आधार पर फैसला लिया जाएगा।

प्रशासन का बयान

डीसीपी काशी ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर बताया कि विवाद को शांति से हल करने की कोशिश की जा रही है और दोनों पक्षों को शांत रहने के निर्देश दिए गए हैं।

क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?

यह विवाद केवल निजी जमीन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें राजनीतिक रसूख, दबंगई और आम नागरिक के अधिकारों का टकराव झलकता है। एक ओर पूर्व विधायक का बेटा है, जिसके खिलाफ पीड़ित पक्ष दबाव बनाने का आरोप लगा रहा है, वहीं दूसरी ओर आम लोग हैं जो अपने अधिकार और रास्ते की लड़ाई लड़ रहे हैं। प्रशासन पर भी अब यह दबाव है कि वह निष्पक्ष जांच करे और पीड़ित पक्ष को न्याय दिलाए।

👉 यह केस इस बात की मिसाल है कि कैसे जमीन विवाद सामाजिक तनाव और राजनीतिक टकराव का बड़ा कारण बन सकता है। अब सबकी निगाहें प्रशासन की कार्रवाई और आने वाले फैसले पर टिकी हैं।


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